बीरेंद्रनगरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
देवीप्रसाद चौबे (INC) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 73.2% वोट पाकर बीरेंद्रनगर सीट जीती और महानी टीकमदास शास्त्री (निर्दलीय) को 23,358 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 152 किरनापुर थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 152 केशलूर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — देवीप्रसाद चौबे 63.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | देवीप्रसाद चौबे कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 26,93673.2% |
| 2 | महानी टीकमदास शास्त्री निर्दलीय | निर्दलीय | 3,5789.7% |
| 3 | चुरामन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3576.4% |
| 4 | चंद्रोराम यादव | 1,8074.9% | |
| 5 | गोपाल दास निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6834.6% |
| 6 | विघ्नहरण सिंह महागठबंधन | महागठबंधन | 4411.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और एक निर्दलीय को 83% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.81 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बीरेंद्रनगर से कौन जीता, 1967–1972
INC ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत लगभग 1967 जितना ही रहा: 49.3%।
- 1967एम. सिंघानिया (IND), जीत का अंतर 4.3%
- 1972देवीप्रसाद चौबे (INC), जीत का अंतर 63.5%