माओविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2002
आर.के. थेखो (INC) ने 2002 के विधान सभा चुनाव में 30.6% वोट पाकर माओ सीट जीती और सोसो लोरहो (FPM) को 451 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 48 लियाई थी। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
माओ का फ़ैसला सिर्फ़ 1.0% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 451 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | आर.के. थेखो | 13,38730.6% | |
| 2 | सोसो लोरहो FPM | FPM | 12,93629.6% |
| 3 | एम. थोहरी | 10,62824.3% | |
| 4 | एन. लोली माओ NDA | NDA | 6,75515.4% |
| 5 | लोली लोहे NNLP | NNLP | 750.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.79 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
सेनापति ज़िला · 4.8 लाख लोग · जनगणना 2011
कीवी और हल्दी के लिए प्रसिद्ध।
यह ज़िलाटूटी रेखा = भारत
यहाँ कौन रहता है?
यहाँ कौन-कौन से धर्म माने जाते हैं?
- ईसाई89.1%
- हिंदू9.2%
- बौद्ध0.5%
- मुस्लिम0.3%
- सिख<0.1%
- जैन<0.1%
- अन्य धर्म (आदिवासी आस्थाओं समेत)0.3%
- नहीं बताया0.6%
नल में पानी, बिजली और शौचालय वाले घर
सेहत और परिवार
आसपास के प्रसिद्ध स्थान
प्रसिद्ध स्थानों के आँकड़े: Wikidata (CC0) · ASI (भारत सरकार, आधिकारिक)। तस्वीरें: Wikimedia Commons (हर फ़ाइल का अपना CC / पब्लिक-डोमेन लाइसेंस, हर फ़ाइल देखें)। नक्शे का डेटा © OpenStreetMap contributors.
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
माओ से कौन जीता, 1974–2022
INC ने 2000 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 58.9% से घटकर 30.6% रह गया। यह 1984 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2000 के 92.3% से बढ़कर 97.9% हो गया। इसके बाद 2007 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।
- 1974ख. थेखो (MHU), जीत का अंतर 1.1%
- 1980सोशो लोरहो (INC(I)), जीत का अंतर 6.9%
- 1984लोरहो (INC), जीत का अंतर 0.6%
- 1990लोरहो (INC), जीत का अंतर 2.7%
- 1995एम. थोहरी (ICS), जीत का अंतर 26.0%
- 2000एम. थोहरी (INC), जीत का अंतर 23.7%
- 2002आर.के. थेखो (INC), जीत का अंतर 1.0%
- 2007एम. थोहरी (IND), जीत का अंतर 14.0%
- 2012दिखो (NPF), जीत का अंतर 19.9%
- 2017लोसी दिखो (NPF), जीत का अंतर 31.3%
- 2022लोसी दिखो (NPF), जीत का अंतर 16.7%