पेरिंगलमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1987
पी. आर. कुरुप (JNP) ने 1987 के विधान सभा चुनाव में 45.8% वोट पाकर पेरिंगलम सीट जीती और ई. टी. मोहम्मद बषीर (MUL) को 356 वोटों से हराया।
1965 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1960 में सीट नंबर 13 क्विलोन थी। 1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं; इस सीट का नंबर और नाम वही रहा। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 13 तलश्शेरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
पेरिंगलम का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 356 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पी. आर. कुरुप | 41,69445.8% | |
| 2 | ई. टी. मोहम्मद बषीर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | 41,33845.4% |
| 3 | गोपालन परम्बथ | 7,6588.4% | |
| 4 | आयेरी अबूबकर निर्दलीय | निर्दलीय | 4130.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JNP, MUL और BJP को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.37 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पेरिंगलम से कौन जीता, 1965–2006
JNP ने यह सीट IML से छीन ली, जिसने इसे 1982 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1965 से शुरू होता है, यह JNP की पहली जीत थी। 1965 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1982 के 72.1% से बढ़कर 78.9% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट MUL ने जीती।
- 1965पी. रामुन्नी कुरुप (SSP), जीत का अंतर 27.2%
- 1967पी.आर. कुरुप (SSP), जीत का अंतर 49.6%
- 1970सूपी के. एम. (ISP), जीत का अंतर 14.2%
- 1977पी. आर. करूप (INC), जीत का अंतर 3.0%
- 1980ए. के. शशींद्रन (INC(U)), जीत का अंतर 8.3%
- 1982एन. ए. मम्मू हाजी (IML), जीत का अंतर 27.8%
- 1987पी. आर. कुरुप (JNP), जीत का अंतर 0.4%
- 1991के.एम. सूप्पी (MUL), जीत का अंतर 1.6%
- 1996पी.आर. कुरुप (JD), जीत का अंतर 13.6%
- 2001के.पी. मोहनन पुत्र पी.आर. कुरुप (JD(S)), जीत का अंतर 6.3%
- 2006के. पी. मोहनन पुत्र पी. आर. कुरुप (JD(S)), जीत का अंतर 17.3%