चामराजनगरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1994
वाटाल नागराज (KCVP) ने 1994 के विधान सभा चुनाव में 26.7% वोट पाकर चामराजनगर सीट जीती और एस. पुट्टस्वामी (INC) को 5,982 वोटों से हराया।
2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 120 उडुपी है।
विजेता
5.6% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | वाटाल नागराज KCVP | KCVP | 28,33426.7% |
| 2 | एस. पुट्टस्वामी | 22,35221.1% | |
| 3 | सी. गुरुस्वामी जनता दल | जनता दल | 21,16219.9% |
| 4 | ए.एस. नटराजु | 13,17012.4% | |
| 5 | हनुमंत शेट्टी KCP | KCP | 10,3449.7% |
| 6 | मल्लेशु KRRS | KRRS | 4,2514.0% |
| 7 | एम.सी. स्वामी निर्दलीय | निर्दलीय | 2,5952.4% |
| 8 | एम. मादय्या निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5691.5% |
| 9 | के. नागेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3891.3% |
| 10 | बसवराजू निर्दलीय | निर्दलीय | 3930.4% |
| 11 | वेंकटरामनायक निर्दलीय | निर्दलीय | 3000.3% |
| 12 | सी. बसवराजू निर्दलीय | निर्दलीय | 1830.2% |
| 13 | पी.डी. कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1080.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 68% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.47 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
चामराजनगर से कौन जीता, 1978–2004
KCVP ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1978 से शुरू होता है, यह KCVP की पहली जीत थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 69.2% से बढ़कर 74.0% हो गया। इसके बाद 1999 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।