विराजपेटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
सुमा वसंद (INC) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 53.6% वोट पाकर विराजपेट सीट जीती और जी. एस. पुष्कर (JD) को 15,252 वोटों से हराया।
2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 126 तरीकेरे है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — सुमा वसंद 25.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुमा वसंद | 32,12453.6% | |
| 2 | जी. एस. पुष्कर राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 16,87228.2% |
| 3 | पी. पी. चोमा | 6,41610.7% | |
| 4 | एच. टी. देवराज JNP(JP) | JNP(JP) | 4,2037.0% |
| 5 | बंगारा स्वामी निर्दलीय | निर्दलीय | 2940.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, JD और BJP को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.61 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
विराजपेट से कौन जीता, 1978–2004
INC ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1983 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 54.9% से घटकर 53.6% रह गया। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत लगभग 1985 जितना ही रहा: 55.6%। इसके बाद 1994 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।