जंदराह घरोटाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1987
शिव देव सिंह (INC) ने 1987 के विधान सभा चुनाव में 34.6% वोट पाकर जंदराह घरोटा सीट जीती और रतन चन्द गांधी (निर्दलीय) को 4,234 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 63 रणबीर सिंह पुरा थी। 1987 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1996 से सीट नंबर 63 बनी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.2% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शिव देव सिंह | 13,12134.6% | |
| 2 | रतन चन्द गांधी निर्दलीय | निर्दलीय | 8,88723.4% |
| 3 | धान राज बरगोत्रा जनता | जनता | 8,04721.2% |
| 4 | कारी अब्दुल नबी निर्दलीय | निर्दलीय | 2,9057.7% |
| 5 | करण देव सिंह JPP | JPP | 1,9325.1% |
| 6 | सोहन लाल | 1,7294.5% | |
| 7 | रघुबीर सिंह पलवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3413.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.33 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1996 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1996 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जंदराह घरोटा से कौन जीता, 1977–1987
INC ने 1983 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 43.2% से घटकर 34.6% रह गया। मतदान प्रतिशत 1983 के 63.0% से बढ़कर 71.4% हो गया।