देवसरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1987
पीरजादा-गुलाम-अहमद (JKN) ने 1987 के विधान सभा चुनाव में 50.5% वोट पाकर देवसर सीट जीती और हमीद उल्ला रंगरेज (निर्दलीय) को 2,619 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में भी सीट नंबर 34 का नाम देवसर था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 1987 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1996 से सीट नंबर 34 राजपोरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पीरजादा-गुलाम-अहमद | 17,16950.5% | |
| 2 | हमीद उल्ला रंगरेज निर्दलीय | निर्दलीय | 14,55042.8% |
| 3 | महेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2543.7% |
| 4 | सैयद अब्दुल हमीद निर्दलीय | निर्दलीय | 5191.5% |
| 5 | मोहम्मद शफी निर्दलीय | निर्दलीय | 2790.8% |
| 6 | अब्दुल रहमान तांत्री निर्दलीय | निर्दलीय | 2310.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JKN और एक निर्दलीय को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.27 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2024 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2024 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
देवसर से कौन जीता, 1977–1987
1977 से यहाँ हर चुनाव JKN ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 53.7% से घटकर 50.5% रह गया। मतदान प्रतिशत 1983 के 78.4% से घटकर 75.8% रह गया।