रियासीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1983
जगजीवन लाल (JKN) ने 1983 के विधान सभा चुनाव में 32.9% वोट पाकर रियासी सीट जीती और रजित सिंह (INC) को 1,202 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में भी सीट नंबर 52 का नाम रियासी था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 1987 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1996 से सीट नंबर 52 इंदरवाल है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जगजीवन लाल | 7,89532.9% | |
| 2 | रजित सिंह कांग्रेस (इंदिरा) | कांग्रेस (इंदिरा) | 6,69327.9% |
| 3 | ऋषि कुमार कौशल | 4,67119.4% | |
| 4 | भीम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4,45718.6% |
| 5 | प्रताप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1960.8% |
| 6 | मौलाना गुलाम मोहम्मद निर्दलीय | निर्दलीय | 1150.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.88 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2024 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2024 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रियासी से कौन जीता, 1977–1987
JKN ने यह सीट JNP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 54.0% से बढ़कर 58.3% हो गया। इसके बाद 1987 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।