सोनीपतविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
शाम दास (INC) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 37.1% वोट पाकर सोनीपत सीट जीती और सतेन्द्र (JP) को 8,600 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 41 कलानौर थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 41 रतिया है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
12.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शाम दास | 25,62337.1% | |
| 2 | सतेन्द्र JP | JP | 17,02324.6% |
| 3 | देवी दास | 11,71516.9% | |
| 4 | राम फल जनता दल | जनता दल | 7,37110.7% |
| 5 | ओम प्रकाश पुत्र हरि सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5,7818.4% |
| 6 | राजिंदर पुत्र सिरी राम निर्दलीय | निर्दलीय | 4360.6% |
| 7 | हुकम चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 3640.5% |
| 8 | राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3030.4% |
| 9 | कंवल सिंह बेधड़क PDL | PDL | 1690.2% |
| 10 | अश्वनी कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1080.2% |
| 11 | रामधन निर्दलीय | निर्दलीय | 1030.1% |
| 12 | ओम प्रकाश पुत्र कनिब्या | 820.1% | |
| 13 | राजिंदर कुमार पुत्र मनोहर लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 440.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.08 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सोनीपत से कौन जीता, 1977–2005
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह INC की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 64.4% से घटकर 58.9% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।