जनमत सर्वेक्षण वाला चुनाव
क्या हुआ
यह चुनाव एक क़रीबी मुक़ाबले पर टिका रहा, जिसका फ़ैसला कुछ ही सीटों से हुआ।
महाराष्ट्रवादी गोमांतक ने 16 सीटें जीतीं — बहुमत के लिए बस उतनी ही, एक भी ज़्यादा नहीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी यूनाइटेड गोअन्स (सिकेरा ग्रुप) ने 12 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह इस केंद्र शासित प्रदेश का यहाँ दर्ज सबसे पुराना विधान सभा चुनाव है, इसलिए इन आँकड़ों में तुलना के लिए इससे पहले का कोई परिणाम नहीं है।
कुल मिलाकर सिर्फ़ 3 समूहों ने सीटें जीतीं, जिनमें से 2 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से आईं।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में भी दोनों प्रतिद्वंद्वी क़रीब रहे — 40.4% के मुक़ाबले 38.0%।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला दीव, गोवा, दमन और दीव में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 51 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, मडकई, गोवा, दमन और दीव सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला रहा, जहाँ जीत का अंतर 87.4% वोट था।
इस चुनाव का सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) सांताक्रूज, गोवा, दमन और दीव में रहा, 79.4%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला सत्तरी, गोवा, दमन और दीव में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव केंद्र शासित प्रदेश के अपने भविष्य पर हुए एक ऐसे मतदान के कुछ ही हफ़्तों बाद हुआ, जिस पर सबकी नज़र थी।