मडगावविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1984
भेंब्रे उदय लक्ष्मीकांत (निर्दलीय) ने 1984 के विधान सभा चुनाव में 53.1% वोट पाकर मडगाव सीट जीती और नाईक अनंत नार्सिंवा (INC) को 1,357 वोटों से हराया।
1984 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1989 से सीट नंबर 24 मारमागोवा है।
विजेता
11.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | भेंब्रे उदय लक्ष्मीकांत निर्दलीय | निर्दलीय | 6,13253.1% |
| 2 | नाईक अनंत नार्सिंवा | 4,77541.4% | |
| 3 | फर्नांडिस गिलमैन राडोल्फो | 3593.1% | |
| 4 | सरमलकर जितेन्द्र बासुदेव | 2822.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और INC को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.20 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1989 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1989 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मडगाव से कौन जीता, 1977–1984
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC(U) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1980 के 62.2% से बढ़कर 65.8% हो गया।