सांताक्रूजविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
फर्नांडिस माइकल एंटोनिक कारमिन्हो (INC(U)) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 42.1% वोट पाकर सांताक्रूज सीट जीती और ब्रांको फ्रांसिस्को अफोंसो (MAG) को 1,464 वोटों से हराया।
1984 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1989 से सीट नंबर 11 तालगाव है।
विजेता
13.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
ऴ: तमिल और मलयालम की 'ழ' / 'ഴ' ध्वनि (ल और ड़ के बीच की है)
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | फर्नांडिस माइकल एंटोनिक कारमिन्हो | 4,57442.1% | |
| 2 | ब्रांको फ्रांसिस्को अफोंसो | 3,11028.6% | |
| 3 | सिकेरा जैक इरास्मो JNP(S) | JNP(S) | 2,02518.6% |
| 4 | धोंड माधव मनोहर | 4464.1% | |
| 5 | शिरोडकर चंद्रकांत कालिदास निर्दलीय | निर्दलीय | 4153.8% |
| 6 | सरमलकर मिहानलाल (बप्पा) सदाशिव निर्दलीय | निर्दलीय | 1591.5% |
| 7 | वऴयिल कन्नू गोपाल निर्दलीय | निर्दलीय | 530.5% |
| 8 | फर्नांडिस जेवियर फ्रांसिस्को जसिंटो निर्दलीय | निर्दलीय | 530.5% |
| 9 | अल्वारो जोसे एल्विनो दे ब्रागांज़ा निर्दलीय | निर्दलीय | 280.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.36 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सांताक्रूज से कौन जीता, 1977–1984
INC(U) ने यह सीट JNP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 67.1% से बढ़कर 68.9% हो गया। इसके बाद 1984 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।