घनश्यामपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2005
इजहार अहमद (LJP) ने 2005 के विधान सभा चुनाव में 33.2% वोट पाकर घनश्यामपुर सीट जीती और डॉ. महाबीर प्रसाद (RJD) को 4,853 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 86 बिरौल थी। 2005 में, झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2010 से सीट नंबर 86 केवटी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। इजहार अहमद 4.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | इजहार अहमद LJP-वाम दल गठबंधन | LJP-वाम दल गठबंधन | 33,88833.2% |
| 2 | डॉ. महाबीर प्रसाद | 29,03528.5% | |
| 3 | विजयशंकर चौधरी NDA | NDA | 28,05627.5% |
| 4 | हरेन्द्र नारायण सिंह | 4,2584.2% | |
| 5 | लक्ष्मी नायक CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 3,9713.9% |
| 6 | विद्यानंद राम | 2,7422.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.69 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.03 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
घनश्यामपुर से कौन जीता, 1977–2005
LJP ने यह सीट RJD से छीन ली, जिसने इसे 2005 (फ़रवरी) में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह LJP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2005 (फ़रवरी) के 43.1% से बढ़कर 43.9% हो गया।
- 1977महावीर प्रसाद (JNP), जीत का अंतर 47.3%
- 1980महेन्द्र नारायण झा (INC(I)), जीत का अंतर 21.8%
- 1985महाबीर प्रसाद (LKD), जीत का अंतर 10.8%
- 1990महावीर प्रसाद (JD), जीत का अंतर 8.7%
- 1995महाबीर प्रसाद (JD), जीत का अंतर 13.3%
- 2000महावीर प्रसाद (RJD), जीत का अंतर 11.1%
- 2005 (फ़रवरी)डॉ. महावीर प्रसाद (RJD), जीत का अंतर 6.4%
- 2005 (अक्टूबर)इजहार अहमद (LJP), जीत का अंतर 4.8%