अलौलीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1995
पशुपति कुमार पारस (JD) ने 1995 के विधान सभा चुनाव में 45.1% वोट पाकर अलौली सीट जीती और मिश्री सदा (INC) को 17,357 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 184 खगड़िया थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 184 बाढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — पशुपति कुमार पारस 18.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पशुपति कुमार पारस जनता दल | जनता दल | 43,48145.1% |
| 2 | मिश्री सदा | 26,12427.1% | |
| 3 | फुलेश्वर सदा | 17,87318.5% | |
| 4 | राजेन्द्र पासवान | 7,3047.6% | |
| 5 | मनोरमा देवी | 8940.9% | |
| 6 | प्रेम रवि दास निर्दलीय | निर्दलीय | 4330.5% |
| 7 | विनोद रवि दास निर्दलीय | निर्दलीय | 2750.3% |
| 8 | शंकर सदा SJP(R) | SJP(R) | 1150.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.16 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
अलौली से कौन जीता, 1977–2000
JD ने 1990 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 54.1% से घटकर 45.1% रह गया। मतदान प्रतिशत 1990 के 61.1% से बढ़कर 63.0% हो गया। इसके बाद 2000 के चुनाव में यह सीट JD(U) ने जीती।