बहरागोड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
शिबू रंजन खान (निर्दलीय) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 34.5% वोट पाकर बहरागोड़ा सीट जीती और हराधन घोष (INC) को 3,482 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 282 बहरागोड़ा थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 282 सिंदरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शिबू रंजन खान निर्दलीय | निर्दलीय | 16,27234.5% |
| 2 | हराधन घोष | 12,79027.1% | |
| 3 | नील कांता ममातो निर्दलीय | निर्दलीय | 10,89423.1% |
| 4 | रमेश चन्द्र दिगार निर्दलीय | निर्दलीय | 4,0458.6% |
| 5 | निहार रंजन जाना LTC | LTC | 1,2742.7% |
| 6 | दुर्गा पद दाश SUC | SUC | 1,0512.2% |
| 7 | शिब शंकर पंडा निर्दलीय | निर्दलीय | 6601.4% |
| 8 | छीतरमल शर्मा Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 1800.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.93 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1977 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1977 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बहरागोड़ा से कौन जीता, 1967–1972
1967 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। मतदान प्रतिशत 1967 के 44.2% से बढ़कर 52.1% हो गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।