दिसपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
रोबिन बोरदोलोई (INC) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 36.9% वोट पाकर दिसपुर सीट जीती और अतुल बोरा (निर्दलीय) को 3,379 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 52 बाघबर थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 52 जागीरोड है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। रोबिन बोरदोलोई 2.7% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रोबिन बोरदोलोई | 46,87136.9% | |
| 2 | अतुल बोरा निर्दलीय | निर्दलीय | 43,49234.3% |
| 3 | प्रफुल्ल कुमार महंत | 25,68820.2% | |
| 4 | मनेश्वर काथार निर्दलीय | निर्दलीय | 3,8013.0% |
| 5 | चित्तरंजन पटवारी | 1,4191.1% | |
| 6 | मोंजुली देव | 1,2861.0% | |
| 7 | जेठुआ कछारी | 8950.7% | |
| 8 | डॉ. फुकन च. बोरो निर्दलीय | निर्दलीय | 8920.7% |
| 9 | जितुल गोगोई निर्दलीय | निर्दलीय | 7590.6% |
| 10 | सुकई शाह निर्दलीय | निर्दलीय | 7450.6% |
| 11 | नजीर हुसैन निर्दलीय | निर्दलीय | 6810.5% |
| 12 | बंकिम चौधुरी SJP(R) | SJP(R) | 4330.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.38 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दिसपुर से कौन जीता, 1978–2021
INC ने यह सीट AGP से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1983 में जीत दर्ज की थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 52.3% से बढ़कर 59.0% हो गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी INC ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1978तारिणी मोहन बरुआ (JNP), जीत का अंतर 12.4%
- 1983तारिणी मोहन बरुआ (INC), जीत का अंतर 41.7%
- 1985अतुल बोरा (IND), जीत का अंतर 37.8%
- 1991अतुल बोरा (AGP), जीत का अंतर 14.6%
- 1996अतुल बोरा (AGP), जीत का अंतर 41.3%
- 2001रोबिन बोरदोलोई (INC), जीत का अंतर 2.7%
- 2006अकोन बोरा (INC), जीत का अंतर 0.5%
- 2011अकोन बोरा (INC), जीत का अंतर 4.1%
- 2016अतुल बोरा (BJP), जीत का अंतर 46.7%
- 2021अतुल बोरा (BJP), जीत का अंतर 39.7%