जागीरोडविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
बुबुल दास (AGP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 34.3% वोट पाकर जागीरोड सीट जीती और मिलिक दास (INC) को 1,553 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 79 सूतिया थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 79 सिसीबरगांव है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। बुबुल दास 2.2% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बुबुल दास | 24,08034.3% | |
| 2 | मिलिक दास | 22,52732.1% | |
| 3 | मतिराम दास निर्दलीय | निर्दलीय | 4,8206.9% |
| 4 | तिलक दास निर्दलीय | निर्दलीय | 3,9765.7% |
| 5 | गोविन दास निर्दलीय | निर्दलीय | 3,7065.3% |
| 6 | बिमल दास निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6653.8% |
| 7 | जुगल कुमार सैकिया निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6033.7% |
| 8 | नारायण दास निर्दलीय | निर्दलीय | 1,9792.8% |
| 9 | शशि मोहन बिस्वास वाम दल | वाम दल | 1,3621.9% |
| 10 | फनी दास जनता दल | जनता दल | 1,3411.9% |
| 11 | पबित्र दास NAGP | NAGP | 7181.0% |
| 12 | किरण चन्द्र दास निर्दलीय | निर्दलीय | 4060.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 73% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.24 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जागीरोड से कौन जीता, 1978–2021
AGP ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1978 से शुरू होता है, यह AGP की पहली जीत थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 84.7% से घटकर 73.9% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में भी AGP ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1978प्रसाद चन्द्र दोलोई (INC), जीत का अंतर 10.3%
- 1983प्रसाद चन्द्र दलाई (INC), जीत का अंतर 37.0%
- 1985मोती दास (IND), जीत का अंतर 22.8%
- 1991बुबुल दास (AGP), जीत का अंतर 2.2%
- 1996बुबुल दास (AGP), जीत का अंतर 19.8%
- 2001बुबुल दास (AGP), जीत का अंतर 6.2%
- 2006बिबेकानंद दलाई (INC), जीत का अंतर 9.0%
- 2011बिबेकानंद दलाई (INC), जीत का अंतर 24.4%
- 2016पीयूष हज़ारिका (BJP), जीत का अंतर 16.5%
- 2021पीयूष हज़ारिका (BJP), जीत का अंतर 14.8%