डेरगांवविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
बिमलेंद्र बरुआ (SOP) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 33.1% वोट पाकर डेरगांव सीट जीती और अब्दु मलिक (INC) को 1,212 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 98 लाहोवाल थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1978 से सीट नंबर 98 जोरहाट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। बिमलेंद्र बरुआ 3.9% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बिमलेंद्र बरुआ | 10,16133.1% | |
| 2 | अब्दु मलिक कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 8,94929.1% |
| 3 | अमल चन्द्र गोस्वामी निर्दलीय | निर्दलीय | 4,39014.3% |
| 4 | नीला कान्ता हज़ारिका निर्दलीय | निर्दलीय | 3,99113.0% |
| 5 | तरुण कुमार सैकिया निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6478.6% |
| 6 | दुर्गा नाथ काकती | 5871.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 76% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.18 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डेरगांव से कौन जीता, 1967–1972
SOP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 48.8% से बढ़कर 54.8% हो गया।
- 1967एन.एन. शर्मा (INC), जीत का अंतर 13.3%
- 1972बिमलेंद्र बरुआ (SOP), जीत का अंतर 3.9%