येल्लंदुविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
नरसय्या गुम्मडी (निर्दलीय) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 41.2% वोट पाकर येल्लंदु सीट जीती और भुक्या दलसिंह (INC) को 19,287 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 282 नलगोंडा थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 282 पीलेरु है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — नरसय्या गुम्मडी 16.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नरसय्या गुम्मडी निर्दलीय | निर्दलीय | 47,80641.2% |
| 2 | भुक्या दलसिंह | 28,51924.6% | |
| 3 | अब्बय्या वूके निर्दलीय | निर्दलीय | 22,07919.0% |
| 4 | ईश्वरी सुरबका | 14,24212.3% | |
| 5 | एस्लावाथु चिन नामा MCPI(S) | MCPI(S) | 1,9961.7% |
| 6 | कल्थी नारायण निर्दलीय | निर्दलीय | 6250.5% |
| 7 | वज्जा रामुलु निर्दलीय | निर्दलीय | 4460.4% |
| 8 | कृष्ण मोहन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3280.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.55 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
येल्लंदु से कौन जीता, 1978–2004
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट CPI से छीन ली, जिसने इसे 1994 में जीता था। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1994 के 75.7% से घटकर 73.7% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।