महबूबनगरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
चन्द्र शेखर (TDP) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 43.4% वोट पाकर महबूबनगर सीट जीती और पुली वीरन्ना (INC) को 6,688 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 193 वनपर्थी थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 193 पेडना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | चन्द्र शेखर NDA | NDA | 51,06543.4% |
| 2 | पुली वीरन्ना | 44,37737.7% | |
| 3 | जी. सहदेव यादव निर्दलीय | निर्दलीय | 13,71911.7% |
| 4 | ईश्वर एम. MCPI(S) | MCPI(S) | 3,0652.6% |
| 5 | खाजा फ़याज़ुद्दीन निर्दलीय | निर्दलीय | 2,5162.1% |
| 6 | लाइट अंजनेयुलु ATDP | ATDP | 1,2361.1% |
| 7 | अय्यन्ना एल. निर्दलीय | निर्दलीय | 7100.6% |
| 8 | डॉ. महबूब पाशा | 5320.5% | |
| 9 | संजय नाईक AJBP | AJBP | 2310.2% |
| 10 | बालाजी सिंह ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 2270.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
TDP, INC और एक निर्दलीय को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.90 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
महबूबनगर से कौन जीता, 1978–2004
TDP ने 1994 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 58.5% से घटकर 43.4% रह गया। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1994 के 61.3% से घटकर 59.6% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।