दमन और दीवलोक सभा चुनाव का परिणाम, 1996
टंडेल गोपालभाई कल्याणभाई (INC) ने 1996 के लोक सभा चुनाव में 50.6% वोट पाकर दमन और दीव सीट जीती और टंडेल देवजीभाई जोगीभाई (BJP) को 4,931 वोटों से हराया।
विजेता
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | टंडेल गोपालभाई कल्याणभाई | 24,54350.6% | |
| 2 | टंडेल देवजीभाई जोगीभाई | 19,61240.5% | |
| 3 | नूरुल्लाह नूरदीन जीवानी निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6265.4% |
| 4 | सोलंकी सामजीभाई भीखाभाई निर्दलीय | निर्दलीय | 7641.6% |
| 5 | पटेल प्रेमभाई लक्ष्मणभाई निर्दलीय | निर्दलीय | 3630.8% |
| 6 | बारैया भीमजी देवजी निर्दलीय | निर्दलीय | 2930.6% |
| 7 | सोलंकी चंद्रकांत सरवत निर्दलीय | निर्दलीय | 1360.3% |
| 8 | सोलंकी रसिकलाल मंडन निर्दलीय | निर्दलीय | 950.2% |
| 9 | सोलंकी सुरेन्द्र साकर निर्दलीय | निर्दलीय | 560.1% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, BJP और एक निर्दलीय को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.36 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
यह सीट कितनी बार सरकार बनाने वाली पार्टी को मिली?
वोट किस तरह बँटे?
पुरानी सीट, जिस पर आख़िरी चुनाव 2019 में हुआ: तब से इसकी सीमाएँ बदल गईं या सीट ख़त्म हो गई, इसलिए आज के ज़िले या राज्य के आँकड़े नहीं दिखाए गए।
यहाँ से कौन जीता, 1989–1999
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1991 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1989 से शुरू होता है, यह INC की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1991 के 65.5% से बढ़कर 69.1% हो गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।