बालीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
रतन मणि चट्टोपाध्याय (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 42.0% वोट पाकर बाली सीट जीती और सरोज घोषाल (FBL(MG)) को 2,653 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 98 सांकराइल है।
विजेता
12.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रतन मणि चट्टोपाध्याय | 8,95042.0% | |
| 2 | सरोज घोषाल | 6,29729.5% | |
| 3 | हेमोंटा दे निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8638.7% |
| 4 | सुबोध चन्द्र पाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4746.9% |
| 5 | अबनी मोहन मुखार्जी | 1,0514.9% | |
| 6 | पतित पावन पाठक | 8704.1% | |
| 7 | राम चन्द्र शर्मा SP | SP | 4011.9% |
| 8 | नरसिंह सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1470.7% |
| 9 | बनारसी दास शर्मा RRP | RRP | 1400.7% |
| 10 | नित्यानंद भादुड़ी निर्दलीय | निर्दलीय | 1320.6% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.57 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।