जगतबल्लभपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
अमृता लाल हजरा (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 29.9% वोट पाकर जगतबल्लभपुर सीट जीती और पशुपति मुखोपाध्याय (निर्दलीय) को 3,426 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 92 डोमजुड़ है।
विजेता
11.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अमृता लाल हजरा | 8,95129.9% | |
| 2 | पशुपति मुखोपाध्याय निर्दलीय | निर्दलीय | 5,52518.5% |
| 3 | श्याम कृष्ण माजी निर्दलीय | निर्दलीय | 4,34914.5% |
| 4 | राजेन्द्र नाथ माइति निर्दलीय | निर्दलीय | 4,02213.4% |
| 5 | दुर्गापदो चट्टोपाध्याय KMPP | KMPP | 2,5718.6% |
| 6 | प्रेमतोष बसु | 1,8916.3% | |
| 7 | पंचानन चक्रवर्ती निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5835.3% |
| 8 | माणिक सीट निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0183.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 63% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.61 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।