चुनाव की कहानी
क्या हुआ
राज्य के विधान सभा चुनाव में एक पार्टी ने भारी जीत हासिल की और छोटे दलों की भीड़ को आसानी से पीछे छोड़ दिया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 60 सीटों में से 40 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 9 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी सोशलिस्ट पार्टी सिर्फ़ 11 सीटें जीत सकी।
क्या बदला
इस विधान सभा के कुछ निर्वाचन क्षेत्र बहु-सदस्यीय थे, जहाँ एक ही मुक़ाबले से सदन में एक से ज़्यादा सदस्य पहुँचते थे।
विंध्य प्रदेश के 48 निर्वाचन क्षेत्रों में से 12 इसी तरह के थे।
कुल मिलाकर इन निर्वाचन क्षेत्रों ने विधान सभा के लिए 60 सदस्य चुने।
लगभग 29.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: कनपुरा, विंध्य प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 22 वोटों से हुआ।
दूसरे छोर पर, इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) लिधौरा, विंध्य प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता 52.3% वोट से आगे था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) निवाड़ी, विंध्य प्रदेश में रहा, जहाँ 57.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला मऊगंज नईगढ़ी, विंध्य प्रदेश में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस राज्य के मतदाताओं ने इसके अलावा कभी कोई विधान सभा नहीं चुनी।