खैरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
चौ. महेन्द्र सिंह (BJP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 40.0% वोट पाकर खैर सीट जीती और जगवीर सिंह पुत्र हरबंश सिंह (JD) को 5,392 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 377 कोल थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 377 किठौर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
14 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | चौ. महेन्द्र सिंह | 33,73640.0% | |
| 2 | जगवीर सिंह पुत्र हरबंश सिंह जनता दल | जनता दल | 28,34433.6% |
| 3 | उषा रानी | 10,23712.2% | |
| 4 | जहारिया | 5,8436.9% | |
| 5 | ब्रज राज निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6001.9% |
| 6 | जगवीर सिंह पुत्र मोहन सिंह JP | JP | 1,1871.4% |
| 7 | मोहम्मद अख़्तरा खान निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1661.4% |
| 8 | सुख पाल | 8621.0% | |
| 9 | राज पाल निर्दलीय | निर्दलीय | 6110.7% |
| 10 | मोहर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2740.3% |
| 11 | श्याम कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1160.1% |
| 12 | ओम प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 1100.1% |
| 13 | ग्रीश चन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 1040.1% |
| 14 | राकेश गौड़ निर्दलीय | निर्दलीय | 690.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.40 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
खैर से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट JD से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 47.7% से घटकर 46.3% रह गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974प्यारे लाल (INC), जीत का अंतर 11.2%
- 1977प्यारे लाल (JNP), जीत का अंतर 25.1%
- 1980शिवराज सिंह (INC(I)), जीत का अंतर 8.9%
- 1985जग वीर (LKD), जीत का अंतर 15.3%
- 1989जगवीर सिंह (JD), जीत का अंतर 17.5%
- 1991चौ. महेन्द्र सिंह (BJP), जीत का अंतर 6.4%
- 1993जगवीर सिंह (JD), जीत का अंतर 4.1%
- 1996ज्ञान वती (BJP), जीत का अंतर 18.5%