श्यामदेउरवाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
ज्ञानेंद्र (BJP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 36.5% वोट पाकर श्यामदेउरवा सीट जीती और राम अधार (JD) को 29 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 193 पनियरा थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 193 सगड़ी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
श्यामदेउरवा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.0% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 29 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ज्ञानेंद्र | 37,28136.5% | |
| 2 | राम अधार जनता दल | जनता दल | 37,25236.5% |
| 3 | जनार्दन प्रसाद ओझा JP | JP | 17,73317.4% |
| 4 | अमर नाथ | 4,5914.5% | |
| 5 | शमशूल होदा | 3,0113.0% | |
| 6 | भोला नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3311.3% |
| 7 | जोगीश | 4570.5% | |
| 8 | राम हरि वाम दल | वाम दल | 3930.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.33 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
श्यामदेउरवा से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट JD से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 54.9% से बढ़कर 57.7% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974जनार्दन प्रसाद ओझा (SOP), जीत का अंतर 27.2%
- 1977जनार्दन प्रसाद ओझा (JNP), जीत का अंतर 37.2%
- 1980जनार्दन प्रसाद ओझा (JNP(JP)), जीत का अंतर 6.9%
- 1985जनार्धन प्रसाद ओझा (JNP), जीत का अंतर 0.2%
- 1989जनार्दन प्रसाद ओझा (JD), जीत का अंतर 18.2%
- 1991ज्ञानेंद्र (BJP), जीत का अंतर 0.0%
- 1993रामाधार यादव (JD), जीत का अंतर 1.8%
- 1996ज्ञानेन्द्र सिंह (BJP), जीत का अंतर 11.0%