पबियाछड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2023
भगवान चन्द्र दास (BJP) ने 2023 के विधान सभा चुनाव में 44.5% वोट पाकर पबियाछड़ा सीट जीती और सत्यवान दास (INC) को 408 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 50 पबियाछड़ा थी। 2013 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं; इस सीट का नंबर और नाम वही रहा। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
पबियाछड़ा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.9% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 408 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार + नोटानाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | भगवान चन्द्र दास BJP + IPFT (NDA गठबंधन) | BJP + IPFT (NDA गठबंधन) | 19,54244.5% |
| 2 | सत्यवान दास | 19,13443.5% | |
| 3 | गोविन्द दास TIPRA | TIPRA | 4,3319.8% |
| — | नोटा नोटा | नोटा | 4901.1% |
| 4 | अर्जुन नामा निर्दलीय | निर्दलीय | 4551.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
औसत मतदान प्रतिशत (38वाँ), औसत से ज़्यादा नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
इसी चुनाव में त्रिपुरा की दूसरी सीटों के मुक़ाबले
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
त्रिपुरा के औसत के आसपास (60 सीटों में ऊपर से 38वाँ)
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और TIPRA को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.52 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
नोटा को कितने वोट मिले?
वोट नोटा (“इनमें से कोई नहीं”) को मिले
त्रिपुरा की 60 सीटों में ऊपर से 43वाँ
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.99 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
उत्तर त्रिपुरा ज़िला · 6.9 लाख लोग · जनगणना 2011
अगर तेल और चाय के लिए प्रसिद्ध।
यह ज़िलाटूटी रेखा = भारत
यहाँ कौन रहता है?
यहाँ कौन-कौन से धर्म माने जाते हैं?
- हिंदू73.2%
- मुस्लिम15.2%
- ईसाई6.3%
- बौद्ध5.0%
- जैन<0.1%
- सिख<0.1%
- अन्य धर्म (आदिवासी आस्थाओं समेत)<0.1%
- नहीं बताया0.1%
नल में पानी, बिजली और शौचालय वाले घर
सेहत और परिवार
आसपास के प्रसिद्ध स्थान
प्रसिद्ध स्थानों के आँकड़े: Wikidata (CC0) · ASI (भारत सरकार, आधिकारिक)। तस्वीरें: Wikimedia Commons (हर फ़ाइल का अपना CC / पब्लिक-डोमेन लाइसेंस, हर फ़ाइल देखें)। नक्शे का डेटा © OpenStreetMap contributors.
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पबियाछड़ा से कौन जीता, 1977–2023
BJP ने 2018 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 55.1% से घटकर 44.5% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2018 के 91.3% से घटकर 87.7% रह गया।
- 1977बिन्दु भूषण मालकाट (CPM), जीत का अंतर 30.0%
- 1983बिधु भूषण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 7.6%
- 1988बिधु भूषण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 3.0%
- 1993बिन्दु भूषण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 23.4%
- 1998बिधु भूषण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 16.0%
- 2003बिधुभूषण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 7.8%
- 2008बिधु भूषण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 7.3%
- 2013समीरण मालाकार (CPM), जीत का अंतर 3.4%
- 2018भगवान दास (BJP), जीत का अंतर 14.1%
- 2023भगवान चन्द्र दास (BJP), जीत का अंतर 0.9%
त्रिपुरा में अगला चुनाव फ़रवरी 2028 में होना है। त्रिपुरा 2028 चुनाव का अपना अनुमान बनाइए →