पेरूरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
कृष्णकुमार एम.ए.पी.ए. उर्फ़ रोहिणी (ADMK) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 55.5% वोट पाकर पेरूर सीट जीती और नागेश्वरी थिरुमती एन. (DMK) को 35,264 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1971 में सीट नंबर 107 किनथुक्कडवु थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 107 भवानीसागर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — कृष्णकुमार एम.ए.पी.ए. उर्फ़ रोहिणी 20.7% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कृष्णकुमार एम.ए.पी.ए. उर्फ़ रोहिणी Secular Democratic Progressive Front (SDPF) | Secular Democratic Progressive Front (SDPF) | 94,60755.5% |
| 2 | नागेश्वरी थिरुमती एन. | 59,34334.8% | |
| 3 | पलानीस्वामी एम. | 9,9795.8% | |
| 4 | शेनभकराज एम. निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3041.4% |
| 5 | महेश्वरी थिरुमती ए. निर्दलीय | निर्दलीय | 1,9891.2% |
| 6 | नूर मोहम्मद ए. निर्दलीय | निर्दलीय | 8890.5% |
| 7 | परमेश्वरी सेल्वी जी. निर्दलीय | निर्दलीय | 6800.4% |
| 8 | शिवकुमार एल. निर्दलीय | निर्दलीय | 6730.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
ADMK, DMK और MDMK को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.31 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पेरूर से कौन जीता, 1977–2006
ADMK ने यह सीट DMK से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह ADMK की पहली जीत थी। यह 1984 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 61.8% से घटकर 56.7% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी ADMK ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1977ए. नटराजन (DMK), जीत का अंतर 3.3%
- 1980कोवईथंबी (ADK), जीत का अंतर 0.5%
- 1984ए. नटरासन (DMK), जीत का अंतर 6.4%
- 1989नटराजन, ए. (DMK), जीत का अंतर 22.0%
- 1991राजू के.पी. (ADK), जीत का अंतर 22.3%
- 1996ए. नटरासन (DMK), जीत का अंतर 36.4%
- 2001कृष्णकुमार एम.ए.पी.ए. उर्फ़ रोहिणी (ADMK), जीत का अंतर 20.7%
- 2006वेलुमणि एस.पी. (ADMK), जीत का अंतर 5.8%