करौलीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
जनार्दन गेहलोत (INC) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 36.1% वोट पाकर करौली सीट जीती और हंस राम गुजर (BJP) को 12,553 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 80 निवाई थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 80 राजाखेड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जनार्दन गेहलोत | 30,63736.1% | |
| 2 | हंस राम गुजर NDA | NDA | 18,08421.3% |
| 3 | अशोक सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 14,18016.7% |
| 4 | रविन्द्र भरद्वाज निर्दलीय | निर्दलीय | 11,74713.8% |
| 5 | सुरेश मीना | 5,4146.4% | |
| 6 | गिरधर स्वरूप निर्दलीय | निर्दलीय | 2,5013.0% |
| 7 | टीका राम निर्दलीय | निर्दलीय | 6450.8% |
| 8 | नन्नू | 4350.5% | |
| 9 | राजाराम निर्दलीय | निर्दलीय | 4320.5% |
| 10 | हुकम | 3770.4% | |
| 11 | काली चरण चतुर्वेदी | 3540.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 74% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.38 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
करौली से कौन जीता, 1977–2003
INC ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1990 में जीत दर्ज की थी। यह 1980 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1993 के 59.9% से बढ़कर 63.4% हो गया। इसके बाद 2003 के चुनाव में यह सीट BSP ने जीती।