नागौरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
हरेन्द्र मिर्धा (INC) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 42.5% वोट पाकर नागौर सीट जीती और गजेन्द्र सिंह (निर्दलीय) को 18,870 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में कोई सीट नंबर 191 नहीं थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 191 लाडपुरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — हरेन्द्र मिर्धा 19.1% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हरेन्द्र मिर्धा | 42,05342.5% | |
| 2 | गजेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 23,18323.4% |
| 3 | बंशी लाल सारस्वत NDA | NDA | 19,22419.4% |
| 4 | हाजी गुलाम मुस्तुफा | 10,17510.3% | |
| 5 | दामोदर दास निर्दलीय | निर्दलीय | 2,4462.5% |
| 6 | अब्दुल हमीद खान RJVP | RJVP | 7960.8% |
| 7 | भानु प्रकाश मिर्धा निर्दलीय | निर्दलीय | 6660.7% |
| 8 | डूंगर राम | 4590.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.52 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
नागौर से कौन जीता, 1977–2003
INC ने 1993 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 49.9% से घटकर 42.5% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1993 के 57.8% से बढ़कर 62.3% हो गया। इसके बाद 2003 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।