चिड़ावाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
हरलाल सिंह (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 35.3% वोट पाकर चिड़ावा सीट जीती और मूल चन्द (KLP) को 81 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 27 बानसूर है।
विजेता
चिड़ावा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 81 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हरलाल सिंह | 7,09335.3% | |
| 2 | मूल चन्द KLP | KLP | 7,01234.9% |
| 3 | वैद श्रीधर निर्दलीय | निर्दलीय | 2,66213.3% |
| 4 | वैद कन्हैयालाल RRP | RRP | 2,23011.1% |
| 5 | चंडी प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 6083.0% |
| 6 | हजारी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 4752.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.60 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।