सुजानपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2007
दिनेश सिंह (BJP) ने 2007 के विधान सभा चुनाव में 46.6% वोट पाकर सुजानपुर सीट जीती और रघुनाथ सहाय पुरी (INC) को 328 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 11 जीरा थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 11 अजनाला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुजानपुर का फ़ैसला सिर्फ़ 0.3% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 328 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवारनाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | दिनेश सिंह BJP-SAD Alliance (NDA) (NDA गठबंधन) | BJP-SAD Alliance (NDA) (NDA गठबंधन) | 51,98446.6% |
| 2 | रघुनाथ सहाय पुरी UPA | UPA | 51,65646.3% |
| 3 | नारायण सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,9092.6% |
| 4 | जगदीश राज | 2,2832.0% | |
| 5 | सुकृत शारदा BJSH | BJSH | 1,0981.0% |
| 6 | अविनाश चन्द्र शर्मा UPA | UPA | 6390.6% |
| 7 | बांसो NDA | NDA | 5950.5% |
| 8 | राजीव कुमार | 3120.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और एक निर्दलीय को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.31 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सुजानपुर से कौन जीता, 1977–2007
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 2002 में जीता था; BJP ने यहाँ पिछली बार 1997 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2002 के 66.7% से बढ़कर 76.7% हो गया।