धनौलाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
हरदित सिंह (CPM) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 50.7% वोट पाकर धनौला सीट जीती और देविंदर सिंह (INC) को 623 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 91 रायकोट थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 91 अबोहर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
धनौला का फ़ैसला सिर्फ़ 1.5% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 623 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
2 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हरदित सिंह वाम दल | वाम दल | 21,65350.7% |
| 2 | देविंदर सिंह | 21,03049.3% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM और INC को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.00 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
धनौला से कौन जीता, 1967–1972
CPM ने 1967 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 49.5% से बढ़कर 50.7% हो गया। मतदान प्रतिशत 1967 के 68.1% से घटकर 66.3% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।