खूंटाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1995
सरस्वती हेम्ब्रम (INC) ने 1995 के विधान सभा चुनाव में 32.3% वोट पाकर खूंटा सीट जीती और प्रकाश चन्द्र सोरेन (JMM) को 4,873 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1971 में भी सीट नंबर 9 का नाम खूंटा था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 9 सुन्दरगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। सरस्वती हेम्ब्रम 4.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सरस्वती हेम्ब्रम | 32,55332.3% | |
| 2 | प्रकाश चन्द्र सोरेन | 27,68027.5% | |
| 3 | बीरभद्र सिंह जनता दल | जनता दल | 24,90624.7% |
| 4 | गोलक नाईक | 9,7749.7% | |
| 5 | इंद्रमणि पात्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0082.0% |
| 6 | रसानंद मुर्मू निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5671.6% |
| 7 | दिबाकर सिंह SJP(R) | SJP(R) | 1,2681.3% |
| 8 | चंद्रशेखर बेशरा PSSS | PSSS | 7110.7% |
| 9 | रबीन्द्र मुर्मू निर्दलीय | निर्दलीय | 3490.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.99 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
खूंटा से कौन जीता, 1974–2004
INC ने यह सीट JD से छीन ली, जिसने इसे 1990 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1985 में जीत दर्ज की थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1990 के 57.4% से बढ़कर 76.2% हो गया। इसके बाद 2000 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974रमेश सरेन (INC), जीत का अंतर 21.0%
- 1977रमेश सोरेन (INC), जीत का अंतर 8.7%
- 1980रमेश सोरेन (INC(I)), जीत का अंतर 35.6%
- 1985बिराम मुर्मू (INC), जीत का अंतर 13.3%
- 1990बीरा भद्र सिंह (JD), जीत का अंतर 20.6%
- 1995सरस्वती हेम्ब्रम (INC), जीत का अंतर 4.8%
- 2000गोलक नाईक (BJP), जीत का अंतर 4.0%
- 2004गोलक बिहारी नाईक (BJP), जीत का अंतर 9.3%