देवगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1957
1957 के विधान सभा चुनाव में देवगढ़ से 2 सदस्य चुने गए: रानी ज्योतिमंजरी देबी (GP) और जयदेब ठाकुर (GP)।
1957 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1951 में सीट नंबर 40 चंपुआ थी। 1957 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1961 से सीट नंबर 40 नवापाड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रानी ज्योतिमंजरी देबी | 23,72829.0% | |
| 2 | जयदेब ठाकुर | 23,71829.0% | |
| 3 | हरिप्रसाद देब | 11,97614.6% | |
| 4 | अभिमन्यु सिंह महापात्र | 7,0828.7% | |
| 5 | सत्यनारायण तिवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 5,0236.1% |
| 6 | पूर्णचंद्रता नाईक | 3,0963.8% | |
| 7 | एमानुएल किस्पोट्टा निर्दलीय | निर्दलीय | 2,8443.5% |
| 8 | दयानंद सतपथी | 1,8812.3% | |
| 9 | मडकी मुण्डा निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3081.6% |
| 10 | बालाराम साहू निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1511.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.89 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।