तीर्थहल्लीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
कोनंदूरलिंगप्पा (SOP) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 36.7% वोट पाकर तीर्थहल्ली सीट जीती और के. टी. दानम्मा (INC) को 2,566 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 155 कोलार थी।
विजेता
6.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कोनंदूरलिंगप्पा | 15,42536.7% | |
| 2 | के. टी. दानम्मा | 12,85930.6% | |
| 3 | बी. एन. अप्पण्णा हेग्डे | 12,24329.1% | |
| 4 | सुशीलम्मा | 1,4833.5% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
औसत मतदान प्रतिशत (60वाँ), औसत से ज़्यादा नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
इसी चुनाव में मैसूर की दूसरी सीटों के मुक़ाबले
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मैसूर के औसत के आसपास (216 सीटों में ऊपर से 60वाँ)
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.18 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
तीर्थहल्ली से कौन जीता, 1967–1972
SOP ने यह सीट SSP से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 74.7% से घटकर 67.8% रह गया।
- 1967जी. जी. शांतावेरी (SSP), जीत का अंतर 14.9%
- 1972कोनंदूरलिंगप्पा (SOP), जीत का अंतर 6.1%