सेंवढ़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2003
राम दयाल प्रभाकर (BJP) ने 2003 के विधान सभा चुनाव में 46.4% वोट पाकर सेंवढ़ा सीट जीती और महेन्द्र बौद्ध (INC) को 18,457 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 22 करेरा थी। 2003 में, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 22 दतिया है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — राम दयाल प्रभाकर 17.1% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राम दयाल प्रभाकर NDA | NDA | 50,17746.4% |
| 2 | महेन्द्र बौद्ध | 31,72029.3% | |
| 3 | फूल सिंह बारैया निर्दलीय | निर्दलीय | 12,09411.2% |
| 4 | एडवोकेट अरविन्द कुमार | 5,1664.8% | |
| 5 | अशोक कुमार दण्डोतिया (खटीक) RSMD | RSMD | 4,7594.4% |
| 6 | नत्थू अहिरवार निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2951.2% |
| 7 | चन्द्रशेखर प्रभात निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1951.1% |
| 8 | नरेश धानुक | 9890.9% | |
| 9 | उमेश कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 7130.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.14 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सेंवढ़ा से कौन जीता, 1977–2003
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1998 में जीता था; BJP ने यहाँ पिछली बार 1993 में जीत दर्ज की थी। यह 1985 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1998 के 59.5% से बढ़कर 66.6% हो गया।