सिवनीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
रमेश चन्द जैन (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 51.5% वोट पाकर सिवनी सीट जीती और प्रमोद कुमार जैन उर्फ़ कुंवर साहिब (BJP) को 13,785 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 213 देनवा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 213 कुक्षी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — रमेश चन्द जैन 31.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रमेश चन्द जैन | 22,69151.5% | |
| 2 | प्रमोद कुमार जैन उर्फ़ कुंवर साहिब | 8,90620.2% | |
| 3 | सुभाग्यचंद मालू (सुभाग्य भैया) जनता | जनता | 8,58919.5% |
| 4 | इसरार साबरी वाम दल | वाम दल | 2,0174.6% |
| 5 | बाबूलाल श्रीवास्तव निर्दलीय | निर्दलीय | 5381.2% |
| 6 | भुरा भोई भलावी निर्दलीय | निर्दलीय | 4931.1% |
| 7 | अज़हरुल आलिम निर्दलीय | निर्दलीय | 4571.0% |
| 8 | भैयालाल पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 4070.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, BJP और JNP को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.89 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सिवनी से कौन जीता, 1977–1998
INC ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 42.9% से बढ़कर 48.6% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।