गिरगांवविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
अनंत नारायण नामजोशी (INC) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 48.5% वोट पाकर गिरगांव सीट जीती और गोविन्द मोरेश्वर पेंडसे (निर्दलीय) को 10,929 वोटों से हराया।
1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 6 राजापुर है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — अनंत नारायण नामजोशी 22.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अनंत नारायण नामजोशी | 24,10748.5% | |
| 2 | गोविन्द मोरेश्वर पेंडसे निर्दलीय | निर्दलीय | 13,17826.5% |
| 3 | दत्तप्रसन्नसदाशिव कटदरे | 5,77711.6% | |
| 4 | दामोदर मोतीराम वागल | 3,5047.1% | |
| 5 | चंद्रावती कृष्णराव बेंगेरी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8823.8% |
| 6 | योगानंद स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 1,0592.1% |
| 7 | दत्तात्रय गंगाधर वेलणकर RRP | RRP | 1500.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.06 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।