नागपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
सुशीलाबाई बलराज (INC) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 29.6% वोट पाकर नागपुर सीट जीती और अर्धेंदु भूषण हेमेन्द्र कुमार बर्धन (CPI) को 158 वोटों से हराया।
1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 189 रेणापुर है।
विजेता
नागपुर का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 158 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुशीलाबाई बलराज | 12,85929.6% | |
| 2 | अर्धेंदु भूषण हेमेन्द्र कुमार बर्धन वाम दल | वाम दल | 12,70129.2% |
| 3 | गोविन्द गोपाल भांबुलकर निर्दलीय | निर्दलीय | 11,05925.4% |
| 4 | सुमति बालकृष्ण सुकलीकर | 6,38514.7% | |
| 5 | विजयकांत मुकुंदराव फुलझेले निर्दलीय | निर्दलीय | 3130.7% |
| 6 | दामा मोहन गायधने निर्दलीय | निर्दलीय | 890.2% |
| 7 | वामन नारायण चव्हाण निर्दलीय | निर्दलीय | 670.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.86 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।