विरिंचिपुरमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
संपंगी नायुडु (DMK) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 50.4% वोट पाकर विरिंचिपुरम सीट जीती और कृष्णमूर्ति (INC) को 12,230 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में सीट नंबर 35 अरूर थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 35 नाट्रामपल्ली है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — संपंगी नायुडु 26.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | संपंगी नायुडु | 23,45947.0% | |
| 2 | कृष्णमूर्ति | 11,22922.5% | |
| 3 | आर. राधाकृष्णन निर्दलीय | निर्दलीय | 5,48911.0% |
| 4 | ए. एम. जयरमन निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0434.1% |
| 5 | नेदुंचेरालाथन निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8263.7% |
| 6 | नारायणस्वामी मुदलियार | 1,3392.7% | |
| 7 | टी. आर. रंगासामी रेड्डियार निर्दलीय | निर्दलीय | 5871.2% |
| 8 | वी. पी. कुप्पुसामी गौंडर निर्दलीय | निर्दलीय | 5701.1% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.48 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1967 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1967 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।