पादराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
शनाभाई धुलाभाई परमार (SWA) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 35.4% वोट पाकर पादरा सीट जीती और चंद्रकांत छोटालाल मेहता (INC) को 91 वोटों से हराया।
1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 128 जेतपुर है।
विजेता
पादरा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.2% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 91 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शनाभाई धुलाभाई परमार स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 15,73035.4% |
| 2 | चंद्रकांत छोटालाल मेहता | 15,63935.2% | |
| 3 | चंदुलाल खुशालभाई पटेल NJP | NJP | 8,98820.2% |
| 4 | चतुरभाई भीखाभाई पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8264.1% |
| 5 | शंकरभाई गिरधरलाल पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5773.5% |
| 6 | जसभाई जेठाभाई अमीन | 6611.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.41 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।