चुनाव की कहानी
क्या हुआ
अलग राज्य के तौर पर कुर्ग के पहले और आख़िरी चुनाव में एक पार्टी को साफ़ नियंत्रण मिला, और बाक़ी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के पास गईं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 24 सीटों में से 15 सीटें जीतीं।
इससे उसे बहुमत से 2 सीटें ज़्यादा मिलीं, जबकि बाक़ी 9 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
क्या बदला
कुर्ग की विधान सभा सिर्फ़ इसी एक बार चुनी गई, ऐसे चुनाव में जिसका एक मुद्दा यह भी था कि राज्य अलग रहे भी या नहीं।
इसकी कुछ सीटें बहु-सदस्यीय भी थीं, जहाँ एक ही मुक़ाबले से सदन के लिए एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
18 निर्वाचन क्षेत्रों में से 6 इसी तरह काम करते थे।
इन सीटों से मिलाकर 24 सदस्य सदन में पहुँचे।
अहम आँकड़े
कुर्ग के इकलौते चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला विराजपेट टाउन, कुर्ग में हुआ, जहाँ फ़ैसला सिर्फ़ 48 वोटों से हुआ — इस चुनाव में किसी भी सीट पर जीत का सबसे कम अंतर।
दूसरे छोर पर, नापोक्लु नाड, कुर्ग में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 51.6% वोट रहा — इस चुनाव में किसी भी सीट पर जीत का सबसे बड़ा अंतर, जिसे वोटों की संख्या में नहीं बल्कि वोटों के हिस्से में मापा गया।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भागमंडला नाड, कुर्ग में 80.5% से लेकर सिद्दापुर, कुर्ग में 48.3% तक रहा।
पोन्नमपेटनाड, कुर्ग में किसी भी सीट से ज़्यादा, 8,207 पंजीकृत मतदाता थे, और यहीं इस चुनाव का सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला भी हुआ — कुल 6 उम्मीदवार।
पृष्ठभूमि
बाद में इसी विधान सभा ने यह सवाल सुलझा दिया, और अलग राज्य के रूप में कुर्ग का अस्तित्व ख़त्म हो गया।