सहारविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
ज्योति (INC) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 47.9% वोट पाकर सहार सीट जीती और सिद्ध नाथ राम (IPF) को 3,854 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 224 सासाराम थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 224 अरवल है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। ज्योति 3.7% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ज्योति | 49,64247.9% | |
| 2 | सिद्ध नाथ राम IPF | IPF | 45,78844.1% |
| 3 | भगवती प्रसाद वर्मा राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 6,6066.4% |
| 4 | शारदा देबी निर्दलीय | निर्दलीय | 3880.4% |
| 5 | राम प्रवेश राम निर्दलीय | निर्दलीय | 3300.3% |
| 6 | जवाहर लाल राम निर्दलीय | निर्दलीय | 3140.3% |
| 7 | महेन्द्र प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 2380.2% |
| 8 | कपिल मुनि राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2250.2% |
| 9 | शिव बचन राम SSD | SSD | 2060.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, IPF और JD को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.34 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सहार से कौन जीता, 1977–2000
INC ने 1985 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 55.0% से घटकर 47.9% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 48.0% से बढ़कर 64.0% हो गया। इसके बाद 1995 के चुनाव में यह सीट CPI(ML)(L) ने जीती।