भवनाथपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
शंकर प्रताप देव (SWA) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 69.4% वोट पाकर भवनाथपुर सीट जीती और जदुनंदन तिवारी (INC) को 11,199 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में कोई सीट नंबर 315 नहीं थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 315 का नाम अब भी भवनाथपुर है, अब नई सीमाओं के साथ। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — शंकर प्रताप देव 49.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शंकर प्रताप देव स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 15,67169.4% |
| 2 | जदुनंदन तिवारी | 4,47219.8% | |
| 3 | हेमेन्द्र नाथ सहीदेव SOC | SOC | 1,3215.8% |
| 4 | रामधनी लाल JHP | JHP | 5832.6% |
| 5 | नागेन्द्र प्रसाद सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 2701.2% |
| 6 | रामावतार शर्मा | 2631.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SWA और INC को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.90 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1977 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1977 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।