चुनाव की कहानी
क्या हुआ
कांग्रेस ने बम्बई का दूसरा विधान सभा चुनाव जीता और फिर सत्ता में बनी रही।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 396 सीटों में से 234 सीटें जीतीं।
इससे वह विधान सभा के 199 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 35 सीटें आगे रही।
उसका सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी कोई पार्टी था ही नहीं: निर्दलीय उम्मीदवारों ने मिलकर 64 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह बम्बई राज्य का दूसरा आम चुनाव था, और आख़िरी भी — ऐसे राज्य में जो अभी-अभी कहीं बड़ा हो गया था।
विधान सभा की सीटें 317 से बढ़कर 396 हो गईं।
कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, यानी एक ही मुक़ाबले से विधान सभा के लिए एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
339 निर्वाचन क्षेत्रों में से 57 में दो-दो सदस्य चुने गए।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला गंगापुर, बम्बई में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 61 वोटों से हुआ।
सबसे बड़ी जीत कुतियाणा, बम्बई में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 86.8% आगे रहा।
उस साल साकोली, बम्बई में सबसे ज़्यादा मतदाता थे — 1,45,846 पंजीकृत मतदाता।
पूरे राज्य में लगभग 54.3% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला — यह बम्बई राज्य में अब तक दर्ज हुआ सबसे ऊँचा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) था।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव भारत के राज्यों के एक बड़े पुनर्गठन के बाद हुआ।