चुनाव की कहानी
क्या हुआ
सौराष्ट्र के इकलौते राज्य चुनाव में कांग्रेस ने भारी जीत हासिल की और लगभग हर सीट अपने नाम की।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने चुनाव वाली 60 में से 55 सीटें जीतीं।
सीटों के हिसाब से उसकी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय थी, जिसके पास सिर्फ़ 2 सीटें थीं।
क्या बदला
नक्शे से राज्य के मिट जाने से पहले यह सौराष्ट्र का इकलौता आम चुनाव था; कुछ साल बाद इसे एक बड़े राज्य में मिला दिया गया।
इसकी कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, जहाँ एक ही मुक़ाबले से विधान सभा में एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
राज्य की 55 सीटों में से 5 सीटें इसी तरह की थीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे करीबी मुक़ाबला लीलिया, सौराष्ट्र में रहा, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 123 वोट था।
दूसरी ओर, सबसे बड़ा जीत का अंतर पोरबंदर तालुका, सौराष्ट्र में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 80.2% आगे रहा।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में बड़ा फ़र्क़ रहा: सबसे ऊँचा ध्रोल जोडिया, सौराष्ट्र में, 70.9%, और सबसे कम लींबडी वढवाण, सौराष्ट्र में, 28.3%।
सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला राजकोट शहर (दक्षिण), सौराष्ट्र में रहा, जहाँ एक ही सीट के लिए 11 उम्मीदवार खड़े थे — पूरे राज्य में प्रति सीट लगभग 4.1 उम्मीदवारों के औसत से काफ़ी ज़्यादा।
पृष्ठभूमि
सौराष्ट्र बहुत कम समय के लिए अलग राज्य रहा; आज़ादी के बाद इसे कई पुरानी रियासतों को मिलाकर बनाया गया था।