नांदगांवविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
पंजाबराव बापुराव यावलीकर (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 30.9% वोट पाकर नांदगांव सीट जीती और विमलाबाई पंजाबराव देशमुख (निर्दलीय) को 847 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 155 कुरुद है।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। पंजाबराव बापुराव यावलीकर 3.3% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पंजाबराव बापुराव यावलीकर | 7,98630.9% | |
| 2 | विमलाबाई पंजाबराव देशमुख निर्दलीय | निर्दलीय | 7,13927.6% |
| 3 | दिनकर सूर्यभान थोरात | 6,85026.5% | |
| 4 | बलवंत उत्तमराव देशमुख KMPP | KMPP | 2,2998.9% |
| 5 | काशीराव जनसा घुलने SP | SP | 4791.9% |
| 6 | नाथू बाबलाजी इंगोले निर्दलीय | निर्दलीय | 4761.8% |
| 7 | केशवराव तुलसीराम जाधव FBL(RG) | FBL(RG) | 4181.6% |
| 8 | हरिभाऊ गणेशराव वाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 2000.8% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.99 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।