सिंदीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
बापुराव मारोतराव देशमुख (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 56.5% वोट पाकर सिंदी सीट जीती और विनायक मधेओराव चौधरी (निर्दलीय) को 12,512 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 146 दंतेवाड़ा है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — बापुराव मारोतराव देशमुख 40.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बापुराव मारोतराव देशमुख | 17,54556.5% | |
| 2 | विनायक मधेओराव चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 5,03316.2% |
| 3 | ज्ञानदेव जानबा बुलकंडे निर्दलीय | निर्दलीय | 4,57314.7% |
| 4 | विठोबाजी चिमण्याजी बांगडे | 2,2127.1% | |
| 5 | विनायक चिंतामण करंदीकर SP | SP | 1,0103.3% |
| 6 | शंकर सदाशिव पंके निर्दलीय | निर्दलीय | 6942.2% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, एक निर्दलीय और एक निर्दलीय को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.68 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।