हिंगणघाटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
रामकिसनदास मोतीलाल मोहोता (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 39.0% वोट पाकर हिंगणघाट सीट जीती और निकंठा मोरारजी चटवाई (निर्दलीय) को 6,246 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 145 बीजापुर है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — रामकिसनदास मोतीलाल मोहोता 18.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रामकिसनदास मोतीलाल मोहोता | 13,14939.0% | |
| 2 | निकंठा मोरारजी चटवाई निर्दलीय | निर्दलीय | 6,90320.5% |
| 3 | गोविन्द पांडू साखरे | 6,28918.6% | |
| 4 | जोगेंद्रनाथ ईशानचंद्र मजूमदार FBL(RG) | FBL(RG) | 5,35515.9% |
| 5 | बलभद्र सरजूप्रसाद तिवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0063.0% |
| 6 | विश्वनाथ लखेजी भगत निर्दलीय | निर्दलीय | 6121.8% |
| 7 | गोपाल सीताराम सिंगरू निर्दलीय | निर्दलीय | 4041.2% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.92 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।